डिप्टी CM नहीं चाहते योगी. मंत्रिमंडल गठन में भी कोई हस्तक्षेप नहीं चाहते योगी

दिल्ली
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार और सोमवार को पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के नेताओं से मुलाकात कर अपनी संभावित कैबिनेट के नामों पर चर्चा की. सूत्र बताते हैं कि नई सरकार में पुराने सदस्यों से ज्यादा नए चेहरों को तवज्जो देने का ज़िक्र योगी ने किया है

डिप्टी CM नहीं चाहते योगी

फिलहाल, सबसे ज्यादा चर्चा उप-मुख्यमंत्री के फॉर्मूले पर हो रही है। सूत्र बताते है कि योगी डिप्टी CM नहीं चाहते है लेकिन भाजपा हाईकमान डिप्टी CM पद को बरकरार रखना चाहता है. फ़िलहाल योगी और भाजपा क़े शीर्ष नेतृत्व में उप-मुख्यमंत्री के फॉर्मूले पर सहमति नहीं बन सकीं है.

दिनेश शर्मा और केशव मौर्य नहीं होंगे डिप्टी CM

सूत्र बताते है कि केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी CM बनाने को लेकर योगी सहमत नही है. केशव प्रसाद मौर्य के चुनाव हारने के बाद डिप्टी सीएम पद पर भाजपा किसी नए नाम को आगे कर सकती है. योगी के विरोध के बाद कहा जा रहा है कि दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य के चुनाव हारने के बाद डिप्टी सीएम के दोनों पद पर नए चेहरे सामने होंगे। जिन नामों पर चर्चा हो रहीं है उन नामों में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह, बेबी रानी मौर्य और एके शर्मा का नाम शामिल है.

10 पुराने मंत्रियों को फिर मिल सकती है जगह

योगी कैबिनेट में करीब 10 पुराने मंत्रियों को जगह मिलना तय बताया जा रहा है।, सुरेश खन्ना, श्रीकांत शर्मा, बृजेश पाठक, सतीश महाना, सिद्धार्थ नाथ सिंह, सूर्य प्रताप शाही, आशुतोष टंडन, नंदकुमार नंदी, कपिल देव अग्रवाल, जतिन प्रसाद, रविंद्र जायसवाल, लक्ष्मीनारायण चौधरी, भूपेंद्र चौधरी, जय प्रताप सिंह और अनिल राजभर के नाम मंत्री पद के दावेदारों में शामिल हैं।

इन नए नामों पर लग सकती है मुहर

2024 के लोकसभा चुनाव को देखते हुए इस बार मंत्रिमंडल में जातीय के साथ क्षेत्रीय संतुलन भी साधा जाएगा। डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य के साथ ही 11 मंत्रियों के चुनाव हारने के कारण काफी संख्या में नए चेहरों को मौका मिलेगा। नई सरकार में शामिल होने वाले संभावित नामों में हरदोई के नितिन अग्रवाल, कायमगंज से विधायक डॉ. सुरभि, प्रयागराज की बारा सीट से विधायक वाचस्पति, इटावा से सरिता भदौरिया, मैनपुरी से जय वीर सिंह, मऊ से रामविलास चौहान, देवबंद से जीत दर्ज करने वाले कुंवर ब्रजेश शामिल हैं। इसके साथ ही पुलिस की नौकरी छोड़कर विधायक बने असीम अरुण तथा राजेश्वर सिंह में से किसी एक का मंत्री बनना तय माना जा रहा है। रिकार्ड मतों से जीतने वाले गाजियाबाद के साहिबाबाद से विधायक सुनील शर्मा, भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह के नाम की भी चर्चा है।

इन महिला चेहरों को मिल सकता है मौका


बलिया के बांसडीह में पहली बार भाजपा का खाता खुलवाने वाली और आठ बार के विधायक रहे रामगोविंद चौधरी को मात देने वाली केतकी सिंह को मौका मिल सकता है। इसके साथ ही कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हुईं रायबरेली सदर विधायक आदिति सिंह, सपा छोड़ भाजपा का दामन थामने वाली मुलायम सिंह यादव की छोटी बहू अपर्णा यादव को मंत्री बनाया जा सकता है।

सहयोगी दल से भी बनेंगे मंत्री

निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे श्रवण कुमार निषाद गोरखपुर की चौरी चौरा सीट से एमएलए बने हैं। वैसे तो संजय निषाद भी MLC हैं, लेकिन इस बात की संभावना जताई जा रही है कि संजय निषाद अपने बेटे को मंत्री बनवाएंगे।
इसके साथ ही अपना दल से एमएलसी आशीष पटेल के अलावा एक और मंत्री अपना दल के कोटे से बनाए जा सकते हैं। कहा जा रहा है कि भाजपा इस बार अपने सहयोगी दलों के कोटे से 4 मंत्री रख सकती है।

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