शुभेन्दु अधिकारी और मुकुल रॉय विपक्ष के नेता के लिए समर्थन जुटानें में जुटें।

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दिल्ली ब्यूरों
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सबसे हाई-प्रोफाइल सीट नंदीग्राम में टीएमसी छोड़कर बीजेपी का दामन थामने वाले शुभेंदु अधिकारी ने भले ही ममता बैनर्जी को हराकर भाजपा में अपना कद बढा लिया हो और विपक्ष के नेता के लिए दावेदारी पेश कर दी हो,लेकिन शुभेन्दु से काफी पहले भाजपा में आए और भाजपा संगठन के लिए लंबे समय से काम कर रहे मुकुल रॉय ने भी इस पद पर अंदरखानें दावेदारी पेश कर शुभेन्दु के सामने चुनौती खड़ी कर दी है।

दोनों दावेदारी और समर्थन जुटानें में जुटें।

चुनाव परिणाम आने के तुरंत बाद सूत्र बताते है कि दोनों नेताओ ने भाजपा के अंदर अपने संपर्को को खटकटाना और समर्थन में आंकडे जुटाना शुरू कर दिया है। दोनो तृणमूल में कद्दावर नेता रहे है। मुकुल रॉय ने काफी पहले भाजपा का दामन थाम लिया था और बंगाल में भाजपा की जड़े मजबूत करने और टीएमसी में सेध लगाने की शुरूआत चुनाव से कई महीनों पहले शुरू कर दी थी और दिल्ली के दिग्गज नेताओं के साथ साथ संघ के कई नेताओं से अपनी नजदीकी बढाने की कोशिशेें शुरू कर दी थी। वही शुभेन्दु ने ऐन चुनाव के वक्त भाजपा का दामन थामा था और नंदीग्राम में ममता को पटकनी देकर भाजपा में अपना कद बढा लिया। शुभेन्दु के अमित शाह से संबंध बेहतर है और इन्ही संबंधों की दम पर शुभेन्दु विपक्ष के नेता पर काबिज होने की को​शिश कर रहे है।

भाजपा के कई नेता शुभेन्दु और मुकुल पर नहीं है राजी

भाजपा के सूत्र बताते है किे दिल्ली भाजपा के कई वरिष्ठ नेता तृणमूल से आए शुभेन्दु अधिकारी और मुकुल रॉय को विपक्ष का नेता बनाने को लेकर सहमत नहीं है। भाजपा नेताओ का कहना है कि विपक्ष के नेता का पद किसी पार्टी के समर्पित नेता को देना चाहिए। मुकुल रॉय का घोटालों में नाम आने और शुभेन्दु की छवि नंदीग्राम में बेहद खराब होने के कारण भाजपा के कई नेता इन दोनों नामों पर असहज महसूस कर रहे है और इनकी तुलना मेे किसी अन्य नाम पर विचार करने की सलाह दे रहे है।

संघ भी नहीं है सहज मुकुल और शुभेन्दु को लेकर

संघ सूत्र बताते है कि संघ भी विपक्ष के नेता का पद इन दोनों के अलावा किसी अन्य नाम पर विचार करने के लिए भाजपा हाईकमान से कह सकता है। तृणमूल की संस्कृति में रचे बचे इन नेताओं को संघ सहजता के साथ स्वीकारे इसकी संभावना बेहद कम है।

दिलीष घोष कर सकते है विरोध

बंगाल भाजपा के अध्यक्ष और सांसद दिलीप घोष मुकुल और शुभेन्दु के नाम पर अपनी आपत्ती दर्ज करा सकते है। दिलीप घोष सांसद होने के साथ प्रदेश अध्यक्ष भी है। ऐसे में दिलीष घोष के विरोध को नजरअंदाज करना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा। ऐसे मेे देखना दिलचस्प होगा कि अंतिम समय दिलीप घोष किस नेता के नाम की पैरवी करते है।

शाह तय करेंगे विपक्ष के नेता का नाम

बंगाल चुनाव की सभी रणनीति अमित शाह के देखरेख में बनी थी। अमित शाह ने 2014 में पार्टी की कमान संभालने के बाद से बंगाल पर फोकस कर दिया था। बंगाल विघानसभा चुनाव के कुछ समय पहले नड्डा भले ही अध्यक्ष बन गए हो, लेकिन बंगाल की असली कमान अमित शाह के हाथों में ही थी। टिकट वितरण से लेकर रणनीति बनाने तक और दूसरे पार्टीयों में सेध लगाने में कमान अमित शाह ने संभाल रखी थी। बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय भी नड्डा से ज्यादा अमित शाह को रिपोर्ट करते थे,और सीधे अमित शाह से निर्देश लेते ​​​​थें। ऐसे में यह तय है कि विपक्ष का नेता कौन होगा इस पर अंतिम मुहर अमित शाह लगाएंगे।

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