असम के मुख्यमंत्री को लेकर शाह और नड्डा में मतभेद, मोदी करेंगे अंतिम फैसला

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दिल्ली ब्यूरो
असम में भाजपा के नेतृत्व वाले गठबंधन ने विधानसभा चुनाव में लगातार दूसरी बार बहुमत हासिल कर लिया है। भाजपा ने जितनें आसानी से बहुमत हासिल किया, लेकिन मुख्यमंत्री का चुनाव करने में उसे उतनी ही परेशानीयों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्यमंत्री कौन होगा इसकों लेकर केन्द्रीय नेताओं से लेकर, विधायक तक दो धड़ों मेें बंट गए है।
एक धड़ा वर्तमान मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का समर्थन कर रहा है जबकि दूसरा धड़ा हिमंता बिस्व सरमा को मुख्यमंत्री बनाए जाने के लेकर केंद्र पर दबाव बना रहा है।

शाह हिमंता को पक्ष में तो नड्डा सर्बानंद सोनोवाल को चाहते है

भाजपा क़े सूत्र बताते हैं क़ि पूर्व अध्यक्ष शाह अपने भरोसेमंद और रणनीति को कुशलता से अमलीजामा पहनाने वाले हिमंता बिस्व सरमा की पैरवी कर रहे है। शाह के अध्यक्षीय काल के समय ​हिमंता ने नार्थ ईस्ट के अन्य राज्यों में शा​ह के देखरेख में भाजपा का परचम फहराया था। शाह का मानना है कि असम मे घुसपैठियों को भगानें और सीएए को लागू करने के लिए असम में हिमंता जैसा कुशल रणनीतिकार मुख्यमंत्री होना चाहिए।
भाजपा अध्यक्ष नड्डा के साथ केन्द्र के कुछ वरिष्ठ नेता वर्तमान मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनवाल को फिर से कमान देना चाहते है। इन नेताओं का तर्क है कि भले ही सर्वानंद को मुख्यमंत्री घोषित नहीं किया गया था, लेकिन चुनाव में उनके चेहरे पर ही भाजपा को बहुमत मिला है। सर्वानद सोनवाल की ईमानदारी और सहजता के साथ साथ संघ का सहयोग भी सर्वानंद के पक्ष में गिना जा रहा है। हिमंता बिस्व सरमा क़े कोंग्रेसी कल्चर के कार्यशैली के कारण भी संघ असहज महसूस कर रहा है।

मोदी लगाएंगे मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम मुहर

असम के मुख्यमंत्री का मामला मोदी के पास पहुच गंया है। सूत्रों की मानें तो असम का मुख्यमंत्री कौन होगा इस पर अंतिम मुहर मोदी लगाएंगे। अमित शाह के हिंमता के पक्ष में पैरवी करने के कारण सर्वानंद के जाने और हिमंता के मुख्यमंत्री बनने की संभावना बढ गई है।

केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने जाना विधायकों का मन

केंद्रीय पर्यवेक्षक के तौर पर केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने मंगलवार को गुवाहाटी पहुंचकर विधायकों का मन टटोला। विधायकों की राय को लेकर तोमर दिल्ली आ गए है। भाजपा संसदीय दल की बैठ​क एक दो दिन में होगी और उसमें मुख्यमंत्री के नाम का फैसला होगा।

भाजपा ने सहयोगी दलों के साथ 75 सीटें हासिल की है।

असम में भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 126 सदस्यीय विधानसभा में 75 सीटें हासिल करके बहुमत हासिल किया है। इसमें अकेले भाजपा ने 60 सीटें हासिल की हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को इतनी ही सीटें मिली थीं। भाजपा ने 49 सीटों पर अपनी पकड़ बरकरार रखकर 11 नई सीटों पर जीत हासिल की।

भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद ने हासिल की नौ सीटें

भाजपा की सहयोगी असम गण परिषद (एजीपी) ने नौ सीटें हासिल की हैं जो पिछले चुनाव में हासिल सीटों से पांच कम है। इसी तरह अन्य सहयोगी यूनाइटेड पीपुल्स पार्टी लिबरल (यूपीपीएल) ने छह सीटें हासिल की हैं और उसने यह सभी सीटें बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (बीपीएफ) से छीनी हैं। बीपीएफ ने इस बार एनडीए से नाता तोड़कर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था।

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