क्या संघ ने मार्च में ही बता दिया था कि बंगाल में भाजपा की सरकार नहीं बनेगी।

दिल्ली ब्यूरों/
पंश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव में भाजपा सत्ता बनाने में पूरी तरह असफल रही और भाजपा की तमाम रणनीति ममता के सामने मिट्टी के ढेर के समान ढह गई। भाजपा के केन्द्रीय नेतृत्व से लेकर बंगाल के संगठन की जिम्मेदारी निभा रहे तमाम दिग्गज नेताओं के साथ तृणमूल छोड़कर भाजपा का दामन थाम चुके तमाम अवसरवादी नेता भी एक राग में कह रहे थें कि भाजपा बंगाल विधानसभा चुनाव में 200 सीटें जीतेगी और सरकार बनाएंगी। लेकिन भाजपा के उलट बंगाल संघ ईकाई ने मार्च में साफ कर दिया था कि भाजपा ने अपनी रणनीति और ​की जा रही गल्तीयों पर सुधार नहीं किया तो भाजपा 100 सीटें भी नहीं जीत पाएंगी।

प्रशांत किशोर के आकलन से सहमत था संघ

संघ के एक वरिष्ठ अधिकारी की मानें तो प्रंशात किशोर के दावे में कि भाजपा 100 सीटें नही पार कर पाएंगी में जमीनी हकीकत की सच्चाई थी। संघ को भी अपने जमीनी केड़र से यही फीड़बैक था कि वर्तमान परिस्थिति में भाजपा को 100 सीटें मिलना भी मुश्किल है।

क्या थी संघ की बंगाल को लेकर रिपोर्ट

चुनावों में भाजपा को जमीनी हकीकत बताने,बूथ प्रबंधन संभालने और रणनीति बनानें में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले संघ के रणनीतिकारों ने बंगाल को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की थी। इस रिपार्ट को संघ के सर्वाच्च निर्णायक मंड़ल प्रतिनिधि सभा की मार्च में बैगलौर में हुई बैठक में प्रस्तुत किया गया था।

रिपोर्ट में 24 पाइंट थे। प्रस्तुत है ​संघ के रिपोर्ट के कुछ अंश

1 इस बैठक में बंगाल संघ के पदाधिकारियों ने कहा था कि बंगाल में भाजपा का सरकार बनाने का दावा हवाई और जमीनी सच्चाई से कोसो दूर है। भाजपा को लग रहा है कि ध्रुवीकरण की राजनीति उसके पक्ष में जा रही है, जबकि ऐसा नहीं होगा।
2 कांग्रेस का दौड़ में न होना भी भाजपा अपने लिए फायदेमंद मान रही है,ले​किन कांग्रेस और वामपंथियों के मतदाता भाजपा से ज्यादा ममता के पास जाएंगे। भाजपा का कांग्रेस और वामपथियों के मतदाताओं का अपने पालें में पूरी तरह से आना एक भ्रम है। ऐसा नहीं होगा।
3 भाजपा तृणमूल के नेताओं को थोक में भर्ती कर रही है। लगातार और भारी संख्या में तृणमूल के नेताओं के भाजपा का दामन थामना, भाजपा के विरोध में जा रहा है। थोक भर्ती अभियान से भाजपा के कार्यकर्ता और संघ के स्वयसेवक ढगा हुआ महसूस कर रहे है, और भाजपा से दूरी बना रहे है।
4 जमीनी स्तर पर आ रहे फीड़बैक को भाजपा के प्रदेश संगठन के साथ साथ, प्रदेश के प्रभारियों और केन्द्रीय नेताओं के पास लगातार भेजा जा रहा है,लेकिन भाजपा संघ के जमीनी आकलन को नजरअंदाज कर रही है।
5 संघ और भाजपा के बीच समन्वय का भारी अभाव है।
6 बंगाल चुनाव को लेकर संघ और भाजपा के बंगाल पदाधिकारियों की साप्ताहिक बैठक का प्रस्ताव था,जिस पर भाजपा ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। रिपोर्ट लिखे जाने तक संघ और भाजपा के बीच एक भी समन्वय बैठ​क नहीं हुई है।
7 भाजपा का प्रदेश संगठन विभिन्न दलों से भाजपा में आए अवसरवादी नेताओं को चुनाव में
टिकट देने की पैरवी कर रहा है, जो सर्वथा अनुचित है। आयातित नेताओं मे से ज्यादातर नेताओं को हार का सामना करना पड़ेगा।
8 दूसरे दलों के नेताओं की तुलना में भाजपा को अपने कार्यकर्ताओं को मैदान में उतारना पार्टी के हित में होगा।

क्यो नजरअंदाज किया भाजपा ने संघ की रिपोर्ट को!

संघ के एक वरिष्ठ नेता की माने तो बंगाल चुनाव में संघ की भूमिका बेह​द कम थी। कोरोना के कारण संघ अपने स्वयसेवकों को पूरी तरह फील्ड में उतारने के लिए तैयार नहीं था। संघ के स्वंयसेव​क बंगाल में कोरोना से संक्रमित लोगों की सेवा में जुटें थे। ऐसे में स्वयसेवको का चुनाव में पूरी ताकत से जुटना संभव नहीं था। संघ के लिए समाज सेवा पहले और राजनीतिक दल का सहयोग बाद में आता है।
संघ के पदाधिकारी का मानना है कि बंगाल चुनाव पूरी तरह केन्द्रीय नेताओं के हाथ में था। स्थानीय संगठन को दिल्ली से आए आदेशों को पालन करवाने तक की जिम्मेदारी थी। ऐसे में संघ के लिए करने के लिए भी बहुत कुछ बचा नहीं था। भाजपा के केन्द्रीय नेताओं को बंगाल संघ की रिपोर्ट से ज्यादा अपने रणनीतिक कौशल और मोदी के करिश्में पर भरोसा था।
संघ के पदाधिकारी की मानें तो अति आत्मविश्वास के साथ अंहकार की भावना ने भाजपा को बंगाल की सत्ता के लिए पॉच साल इंतजार करने के लिए विवश कर दिया।

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Rahul banerjee
Rahul banerjee
1 year ago

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