गहलोत और पायलट के साथ वसुंधरा और बीजेपी में भी अनबन

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दिल्ली ब्यूरो। गहलोत और पायलट के साथ वसुंधरा और बीजेपी में भी अनबन जारी है। इसी अनबन के चलतें बीजेपी राजस्थान में सरकार बनानें से चुक गई।

वसुंधरा की निष्क्रियता से बीजेपी नेतृत्व असहज

राजस्थान में गहलोत और पायलट के बीच मचें घमासान पर वसुंधरा के निष्क्रियता से बीजेपी हाईकमान असहज है। बीजेपी हाईकमान ने राजस्थान में राजनीतिक आपदा को अवसर में बदलनें के लिए वसुंधरा को सक्रिय होने को कहा था। वसुंधरा ने बीजेपी हाईकमान के निर्देशों को अनदेखा करा

गहलोत और पायलट के गुटबाजी का फायदा बीजेपी लेना चाहती थी।

गहलोत और पायलट में जारी खीचतान और खेमेंबाजी का फायदा बीजेपी लेना चाहती थी। वसुंधरा पायटल को भाव देने को तैयार नहीं थी। वसुंधरा ने गहलोत और पायलट के मामलें में मौन साध लिया। वसुंधरा के मौन के कारण भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व दुविधा में रहा।

वसुंधरा कमान अपने हाथ चाहती थी, केन्द्रीय नेतृत्व तैयार नहीं था।

सूत्र बतातें है कि वसुंधरा राजस्थान में फ्री हैड़ चाहती थी, परंतु केन्द्रीय नेतृत्व तैयार नहीं था। वसुंधरा को नजरअंदाज कर पायलट ने दिल्ली भाजपा हाईकमान से संपर्क किया था। वसुंधरा को यह सहन नहीं था कि पायलट उनको नजरअंदाज करें। भाजपा हाईकमान का राजस्थान के अन्य नेताओं को भाव देना भी वसुंधरा को रास नहीं आया। केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को मिल रहे महत्व से भी वसुंधरा ने मौन साध लिया।

वसुंधरा के विद्रो​​​ह के डर से भी बीजेपी हाईकमान ने कदम नहीं बढाए

सूत्र बतातें है कि भाजपा हाईकमान मध्यप्रदेश ऐपिसोड को राजस्थान में दोहराना चाहता था। ज्योतिरादित्य के मार्फत पायलट से बातचीत जारी थी, लेकिन वसुंधरा के मुख्यमंत्री न बनानें पर विद्रोह करने का शक था। भाजपा वसुंधरा को मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहती थी। वसुंधरा ने संकेत दे दिए थे कि उनको न बनानें पर सरकार भी नहीं बनेगी।

वसुंधरा को नजरअंदाज कर प्रदेश के नेताओं को दिल्ली बुलाया।

बीजेपी आलाकमान ने प्रदेश अध्यक्ष पूनिया और विधानसभा में उपनेता राजेंद्र राठौड़ को दिल्ली बुलाया। भाजपा हाईकमान प्रदेश राजस्थान को लेकर प्रदेश के नेताओं से सला​ह लेना चाहता था। भाजपा हाईकमान ने वसुंधरा को दिल्ली से दूर रखा। वसुंधरा को प्रदेश में कमजोर करने का संदेश केन्द्रीय नेतृत्व देना चाहता है। वसुंधरा को दिल्ली की बैठक से दूर रखना इसी रणनीति का हिस्सा है। लेकिन वसुंधरा को कमजोर आंकना हाईकमान की गल्ती होगी, क्योकि वसुंधरा को भरोसे में लिए बगैर भाजपा की सरकार राजस्थान में बनना संभव नहीं है।

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