योगी की पूरी कैबिनेट को जमीन पर उतारने के बाद भी UP पंचायत चुनाव में बीजेपी 75% से ज्यादा सीटें हारी।

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पोलिटिकल डेस्क, दिल्ली/ अगले साल यूपी में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में फिर से सरकार बनाने का दावा कर रही भाजपा को पंचायत चुनाव में जोर का झटका लगा है। योगी सरकार से जनता की नाराजगी और भाजपा संगठन के आपसी खीचतान और जनता से दूर होने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि योगी सरकार के 23 कैबिनेट मंत्री, 22 राज्यमंत्री, 9 राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और सांसद-विधायकों को हर मोर्च पर लगाकर स्पष्ट हिदायत दी गई थी कि किसी भी हालत में चुनाव में जीतना है। सरकार और संगठन ने सारे संसाधन का इस्तेमाल करने के बाद भी भाजपा का सुपड़ा साफ हो गया। भाजपा इन चुनावों को लेकर गंभीर इसलिए थी कि इन चुनावों को राज्य में 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव का सेमी फाइनल माना जा रहा था। योगी सरकार की इतनी बड़ी मंत्रियों की फौज और बूथ लेवल पर मजबूत संगठन होने के बाद भी भाजपा की करारी हार ने भाजपा के माथे पर बल ला दिए है।

3050 सीटों में 690 सीटें ही भाजपा के खातें में, मतलब सिर्फ 23% सीटें

प्रदेश के 75 जिलों में जिला पंचायत सदस्य की कुल 3050 सीटों पर चुनाव हुए हैं। इनमें 690 भाजपा समर्थित उम्मीदवार को ही जीत मिल सकी है। भाजपा महज 23% सीटें हासिल कर सकी, जबकि उसे 77% सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा। भाजपा, सपा, बसपा, कांग्रेस और आरएलडी के खाते में कुल मिलाकर 1474 सीटें गई। इसके अलावा अन्य 1574 सीटें निर्दलीय व अन्य छोटे दल के उम्मीदवार जीते हैं।

भाजपा के करारी हार को ऐसे समझें

मध्य यूपी: यहां की 800 सीटों में से सपा को 250, भाजपा को 155, बसपा को 30 और कांग्रेस को 10 सीटें मिली। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार 355 सीटें जीते हैं।
पूर्वांचल: यहां के 10 शहरों में 527 सीटों में भाजपा को केवल 87 सीट मिली। जबकि सपा 171, बसपा 90 और कांग्रेस 20 सीटों पर जीती। इसके अलावा अन्य 159 सीटें निर्दलीयों के खाते में गईं।
ब्रज क्षेत्र: 9 जिलों में 530 सीटों में से भाजपा को केवल 51 सीटें मिली। सपा को 64 और बसपा को 37 सीटें मिली हैं। इसके अलावा आरएलडी को 27 और कांग्रेस को 16 सीट मिली। 335 पर निर्दलीय व अन्य छोटे दल शामिल हैं।
बुंदेलखंड: 470 सीटों में से भाजपा केवल 39 सीट मिली। सपा और बसपा को 31-31 सीटें मिलीं। इसके अलावा 16 सीटें कांग्रेस को मिलीं। 353 सीटों पर निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के प्रत्याशियों ने बाजी मारी।
पश्चिमी यूपी: 12 शहरों में आरएलडी को 35, सपा को 76 और भाजपा को केवल 62 सीटें मिली हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 460 में 287 सीटों पर निर्दलीय और अन्य छोटे दलों के प्रत्याशी जिला पंचायत सदस्य चुनकर आए।
रुहेलखंड: क्षेत्र की 371 सीटों में से 37 सीटें बीजेपी को मिलीं। सपा को 33, बसपा को 18 और कांग्रेस को 15 सीट मिली हैं। 268 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की है।

सेंट्रल यूपी में सपा से पिछड़ी बीजेपी

अवध क्षेत्र के साथ ही मध्य यूपी के अयोध्या, लखनऊ, गोंडा, बस्ती, अमेठी, कानपुर, इटावा, मैनपुरी, उरई आदि में आए नतीजे बीजेपी के लिए झटका माने जा रहे हैं। भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री बस्ती के सांसद हरीश द्विवेदी के प्रतिनिधि राजेश चौधरी जिला पंचायत के चुनाव में चौथे स्थान पर आए हैं। बस्ती में भाजपा को 45 में 8 सीटें मिली हैं।
कानपुर में दो मंत्री सतीश महाना और नीलिमा कटियार जिला पंचायत सदस्यों को जिताने में कामयाब नहीं हो पाईं। यहां भी सपा आगे रही। सपा ने 285 सीटें और भाजपा ने 155 सीटें जीतने का दावा किया है।
लखनऊ की 25 सीटों में से 10 पर सपा ने कब्जे का दावा किया है जबकि बीजेपी को तीन और बसपा को पांच सीटें मिली हैं। गोंडा जैसे जिले में जहां भाजपा से सांसद कीर्तिवर्धन सिंह हैं और सातों विधानसभा सीटों पर भाजपा का कब्जा है, वहां पर भी सपा ने सबसे ज्यादा 30 और भाजपा ने 17 सीटें जीतने का दावा किया है।

बड़े-बड़े नेता भी जीत नहीं दिला सके

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह तक कानपुर देहात नहीं जीता पाए। यहां पर भी सपा व निर्दलीयों ने बाजी मारी और भाजपा को केवल 4 सीटें मिलीं। निर्दलीय और सपा 11-11 पर रहीं। बसपा 6 सीटें जीत सकी। इसी तरह केशव प्रसाद मौर्य कौशांबी और प्रयागराज में भी भाजपा को नहीं जीता पाए, यहां पर निर्दलीय और समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की।

मथुरा से आने वाले दो मंत्री के क्षेत्र में भाजपा को शिकस्त

मथुरा से आने वाले दो मंत्री श्रीकांत शर्मा और लक्ष्मी नारायण चौधरी क्षेत्र में भाजपा को जीत नहीं दिला सके। यहां पर भी निर्दलीय और बसपा समर्थक ही जीते हैं। मथुरा में 33 जिला पंचायत सीटों पर बसपा 13, भाजपा 8, आरएलडी- 8, अन्य 3 और सपा एक सीट जीत सकी।

किसान आंदोलन और कोरोना ने बिगाड़ा खेल

भाजपा के लिए पश्चिम यूपी में किसान आंदोलन ने तो पूर्वांचल में कोरोना की दूसरी लहर ने खेल बिगाड़ने का काम किया। मेरठ से लेकर शामली, बिजनौर, मुजफ्फरनगर, मुरादाबाद, गाजियाबाद, बुलंदशहर, बागपत, हापुड़, हाथरस, अलीगढ़, मथुरा में पार्टी को करारी मात मिली। पश्चिम यूपी में किसान आंदोलन आरएलडी के लिए संजीवनी साबित हुआ है और बीजेपी के लिए सियासी तौर पर बड़ा झटका है। किसान आंदोलन का असर दिखा, जिसके चलते राष्ट्रीय लोकदल ने 35 सीटें मिलने का दावा किया है। सपा के साथ उसके गठबंधन होने के चलते सपा को 76 सीटें मिली हैं।

भाजपा के प्रदर्शन पर केन्द्रीय नेतृत्व नाराज

पंचायत चुनाव के नतीजों ने बीजेपी हाईकमान के कान खड़े कर दिए है। बे​हद बुरी हार ने भाजपा को सकते में ला दिया है। सूत्र बताते है कि योगी सरकार संगठन पर और प्रदेश संगठन योगी सरकार पर दोष देने में जुटा है। प्रदेश में व्याप्त भारी गुटबाजी के कारण भी भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। केन्द्री नेतृत्व ने भाजपा के खराब प्रदशर्न पर प्रदेश संगठन से रिपोर्ट भेजने को कहा है। योगी की लोकप्रियता और संगठन के मजबूत आधार और संघ के सहयोग के बाद भी भाजपा 75% से ज्यादा सीटें हार गई।

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