संघ और संतों की नाराजगी के बाद सरकार ट्रस्ट में कुछ और लोगों को जगह देनें की तैयारी मे!

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अयोध्या/ अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए ट्रस्ट ‘श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ में महंत नृत्यगोपाल दास का नाम न होने और संघ की सलाह​ को दरकिनार करनें के बाद जहा संतों ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलनें की इच्छा जताई वही संघ ने इस पूरें मामलें में चुप्पी साध ली है। संघ अपनी ही सरकार होनें के कारण सीधें कुछ भी बोलनें से बच रहा है लेकिन संघ के वरिष्ठ अधिकारी की मानें तों ट्रस्ट की टीम संघ के भावनाओं के हि​साब से नहीं है। हालाकि संघ के वरिष्ठ नेता यह भी कहतें है कि राम मंदिर बननें के लिए जो भी संघ से मदद हो सकेगी संघ करेगा। राम मंदिर का महत्व है बाकी सब महत्वहीन है।
संतों के विरोध प्रदर्शन की तैयारी को देखतें हुए हरकत में आए गृह मंत्रालय ने तुरंत साधु संतों की बात गृह​ मंत्री अमित शाह से करवाई और शाह के आश्वासन के बाद मामला फिलहाल टल गया है। संतो के बीच महंत नृत्यगोपालदास को इसका संस्थापक अध्यक्ष न बनानें को लेकर नाराजगी थी।
गृ​​हमंत्री शाह से फोन पर बातचीत होनें के बाद महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने दावा किया कि अमित शाह ने भरोसा दिलाया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास और सचिव चंपत राय होंगे। शाह ने कहा- बाबरी ढांचा विध्वंस केस में फैसला आने के बाद इसकी घोषणा की जाएगी। कानूनी बाधा के चलते महंत नृत्य गोपाल दास और विहिप नेता चंपत राय के ट्रस्ट में शामिल होने की घोषणा नहीं की गई है। दोनों पर विवादित ढांचा गिराने के मामले में केस चल रहा है।
शंकराचार्य बोले- अध्यक्ष पद पर मुझे रखना चाहिए था
वहीं, शंकराचार्य स्वरूपानंद सरस्वती ने कहा, “सुप्रीम कोर्ट ने अपने चार फैसलों में वासुदेवानंद सरस्वती को न शंकराचार्य माना और न ही संन्यासी माना है। ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य मैं हूं। ऐसे में प्रधानमंत्री ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य के रूप में वासुदेवानंद सरस्वती को ट्रस्ट में जगह देकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना की है।” उन्होंने कहा- अगर वास्तव में ट्रस्ट में शंकराचार्य को रखना ही था तो अध्यक्ष पद पर उन्हें रखा जाना चाहिए था।
ट्रस्ट में संत-महंतों का अपमान किया गया: महंत
इससे पहले राम जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपालदास ने कहा था- ट्रस्ट के माध्यम से संत-महंतों का अपमान किया गया है। जिन्होंने पूरे जीवन की कुर्बानी दी है। उनका ट्रस्ट में कहीं कोई नामोनिशान नहीं है। महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास ने कहा था- हम इस ट्रस्ट को मानने के लिए तैयार नहीं हैं। इस ट्रस्ट में वैष्णव समाज के संतों का अपमान किया गया है। जो राम मंदिर आंदोलन के लिए लगे रहे और कुर्बानी दी, उनको ट्रस्ट से दूर रखा गया है।
विमलेंद्र मोहन के नाम पर थी आपत्ति
कमल नयन ने गृहमंत्री अमित शाह से नाराजगी जताते हुए कहा था- ट्रस्ट में पूर्व अयोध्या राजपरिवार के विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्रा को शामिल किया है। जबकि, वे राजनीतिक व्यक्ति हैं। बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े हैं। राम जन्मभूमि आंदोलन से इनका कोई वास्ता नहीं है। पूरे देश में संत समाज इसका विरोध करेगा। राम मंदिर आंदोलन के समय कानून बना था- राम नंदी वैष्णव ही राम जन्मभूमि का अध्यक्ष होगा।
अनशन पर बैठे परमहंस दास
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को ट्रस्ट का संरक्षक और परमाध्यक्ष बनाने की मांग को लेकर अयोध्या की तपस्वी छावनी से निष्कासित महंत परमहंस दास अनशन पर बैठ गए हैं। उन्होंने अन्न व जल सब त्याग दिया है। परमहंस दास यूपी के चंदौली में बुधवार से ही अनशन शुरू किया है।
राम मंदिर निर्माण का कार्य रामनवमी से शुरू होने की उम्मीद
अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण का कार्य रामनवमी यानी दो अप्रैल से शुरू होने की उम्मीद है। शिलान्यास के कार्यक्रम के दौरान खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहेंगे। कार्यक्रम का संदेश देश-दुनिया को देने के लिए कई विदेशी मेहमानों को भी निमंत्रण दिए जाने पर विचार विमर्श हो रहा है।
राम मंदिर का हिंदुओं के लिए ईसाईयों के वेटिकन सिटी और मुसलमानों के मक्का की तरह ही महत्व है। ऐसे में भव्य मंदिर का निर्माण होना तय है।

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