भाजपा के सर्वाच्च बाड़ी पार्लियामेंट्री बोर्ड में दिग्गंजों की दावेदारी। जल्द भरें जाएंगे खाली पद।

अमित शाह की जगह जेपी नड्डा के अध्यक्ष बननें के बाद अब भाजपा के सबसे सर्वाच्च नीति निर्धारक बाड़ी पार्लियामेंट बोर्ड में खाली जगह को भरनें की कवायद शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी,गृ​​ह अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष नड्डा के बीच आरभिंक चर्चा हो गई है। सूत्र बतातें है किे संगठन के विभिन्न पदों को लेकर मोदी और शाह ने नड्डा के अध्यक्ष बननें से पहले कूछ नामों को तय कर लिया था। अब नड्डा के अध्यक्ष बननें के बाद इस सूची को जारी करने की तैयारी हो रही है।
नेशनल ब्यूरों/ अमित शाह की जगह जेपी नड्डा के अध्यक्ष बननें के बाद अब भाजपा के सबसे सर्वाच्च नीति निर्धारक बाड़ी पार्लियामेंट बोर्ड में खाली जगह को भरनें की कवायद शुरू हो गई है। प्रधानमंत्री मोदी,गृ​​ह अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष नड्डा के बीच आरभिंक चर्चा हो गई है। सूत्र बतातें है किे संगठन के विभिन्न पदों को लेकर मोदी और शाह ने नड्डा के अध्यक्ष बननें से पहले कूछ नामों को तय कर लिया था। अब नड्डा के अध्यक्ष बननें के बाद इस सूची को जारी करने की तैयारी हो रही है।
संसदीय बोर्ड में खाली है कई पद
उल्लेखनीय है कि भाजपा संगठन में कई पद रिक्त है और सबसे महत्वपूर्ण और भाजपा की सर्वाच्च निति निर्धारक संस्था भाजपा पार्लियामेंट्री बोर्ड में 4 पद रिक्त है। पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज,पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली,पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और अब उपराष्ट्रपति की जिम्मेंदारी निभा रहें वैकेया नायडू,पूर्व केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार अब संसदीय बोर्ड में नहीं है। उल्लेखनीय है कि पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज,पूर्व वित्त मंत्री अरूण जेटली,पूर्व केन्द्रीय मंत्री अनंत कुमार का निधन होनें के कारण संसदीय बोर्ड में जगह रिक्त हुई है, वही वैकेया नायडू के उपराष्ट्रपति बननें के कारण वह भी अब भाजपा के संसदीय बोर्ड में नहीं है। भाजपा के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी का कहना है ​कि शाह के अध्यक्ष रहतें भी इन रिक्त पदों को भरा जा सकता था। लेकिन एक सोची समझी रणनीति के तहत अध्यक्ष रहतें शाह ने इन पदों को नहीं भरा। लेकिन पार्टी लंबें समय तक पार्लियामेंट बोर्ड के रिक्त पदों से काम नहीं चला सकती। ऐसें में नड्डा के अध्यक्ष बननें के बाद अब इन पदों का भरा जाना तय है।
भाजपा के ससंदीय बोर्ड में अभी गृ​ह मंत्री अमित शाह,प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी,राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा,केन्द्रीय मंत्री और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितीन गड़करी,केन्द्रीय मंत्री और पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह,केन्द्रीय मंत्री थावरचंद गहलोत, संगठन महामंत्री बीएल संतोष और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान है।
भाजपा का एक मुख्यमंत्री आ सकता है पार्लियामेंट बोर्ड में
भाजपा के पार्लियामेंट्री बोर्ड में पहलें नरेंन्द्र मोदी मुख्यमंत्री के रूप में सदस्य हुआ करतें थें। मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अमित शाह ने मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को मुख्यमंत्री होने के कारण पार्लियामेंट्र बोर्ड में जगह दी थी। अब शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री नहीं है। ऐसे में एक मुख्यमंत्री के इसमें आनें के आसार भी है। हालाकि यह जरूरी नहीं है कि मुख्यमंत्री को हर हाल में पार्लियामेंट्री बोर्ड में लिया जाएं।
पार्लियामेंट्री बोर्ड में इन नेताओं को मिल सकती है जगह
भाजपा के पार्लियामेंट्री बोर्ड के दावेदारों में कई नेता शामिल है। दौड़ में सबसें आगें भाजपा के महास​चिव और अमित शाह के भरोसेंमंद साथी भूपेन्द्र यादव का नाम सबसें आगें है।
गुजरात विधानसभा चुनाव के समय भूपेन्द्र यादव को शाह ने संगठन की जिम्मेंदारी दी थी। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भूपेन्द्र यादव ने चुनाव प्रभारी की जिम्मेंदारी निभाई थी। भूपेन्द्र यादव पार्टी के अंदर कुशल संगठनकर्ता के रूप में उभरें है। पार्टी में अरूण जेटली के निधन के बाद उत्पन्न शून्य को भरनें की दम अगर वर्तमान में किसी नेता के पास है तो वह भूपेन्द्र यादव है। कानून के जानकार और संगठन पर पैनी नजर रखनें वाले भूपेन्द्र यादव को भाजपा के भविष्य के अध्यक्ष के रूप में देखा जा रहा है। सबकों साथ लेकर चलनें की योग्यता भूपेन्द्र यादव को अलग और सर्वस्वीकार नेता बनाती है। यादव के अलावा देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन को भाजपा की सर्वाच्च बाडी संसदीय बोर्ड में जगह मिल सकती है। सुषमा स्वराज भाजपा के संसदीय बोर्ड में एकमात्र महिला थी। भाजपा में इस समय दो बडे महिला चेहरें है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन और, केन्द्रीय महिला और बाल विकास और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी। अमित शाह किसी भी स्थिति में स्मृति ईरानी को सर्वाच्च निर्णायक संस्था पार्लियामेंट्री बोर्ड में जगह नहीं देंगे। केन्द में रक्षा मंत्री की जिम्मेंदारी निभा चुकी और अब वित्त मंत्री की जिम्मेंदारी निभा रही निर्मला सीतारमन को जगह मिल सकती है। निर्मला के साथ एक और खूबी यह है कि वह दक्षिण भारत से आती है। दक्षिण भारत से आने वालें वैकेया नायडू और अनंत कुमार दोनों अब पार्लियामेंट्री बोर्ड में नहीं है। कर्नाटक से आने वाले बीएल संतोष जरूर पार्लियामेंट्री बोर्ड में है,लेकिन वह संगठन महामंत्री के रूप में है। नेता के रूप में नहीं। ऐसे में निर्मला सीतारमन का दावा मजबूत है। भूपेंन्द्र यादव और निर्मला सीतारमन के अलावा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का दावा भी पार्लियामेंट्री बोर्ड में मजबूत है। पार्लियामेंट्री बोर्ड में एक मुख्यमंत्री को जगह दी जाती है तों योगी आदित्यनाथ का दावा सबसें मजबूत है। उत्तरप्रदेश जैसे सबसें बड़े प्रदेश के मुखिया होनें के कारण योगी भी जगह बना सकते है। हालाकि उनके खिलाफ राष्ट्रीय राजनीति में अमित शाह का प्रतिद्धद्धी होना भी जा सकता है। मोदी के बाद अमित शाह खुद को प्रधानमंत्री के रूप में देखते है,शाह को चुनौती देनें की स्थिति में योगी आदित्यनाथ ही है। इस कारण हो सकता है कि योगी के कद को रोकनें के लिए योगी आदित्यनाथ को जगह ही न मिलें।
भूपेन्द्र यादव,निर्मला सीतारमन और योगी आदित्यनाथ के बाद जिसकों पार्लियामेंट्री बोर्ड में जगह मिल सकती है वह है रेल मंत्री पीयुष गोयल। पीयुष गोयल के अलावा मोदी और शाह संगठन के किसी व्यक्ति को पार्लियामेंट्री बोर्ड में जगह दे सकते है। या ऐसा भी हो सकता है कि भविष्य के लिए एक पद खाली रखें और बाद में किसी की नियुक्ति कर दें।
संघ के एक राष्ट्रीय पदाधिकारी का कहना है कि भाजपा का संसदीय बोर्ड का पुर्नगठन भविष्य को देखकर मोदी और शाह भाजपा अध्यक्ष नड्डा के साथ मिलकर करेंगे। भाजपा की सर्वाच्च नीति निर्धारक संस्था में बहुत जल्दी परिवर्तन नहीं होतें है। इस कारण मोदी शाह और नड्डा मिलकर भाजपा के आनें वालें सालों को ध्यान में रखकर पार्लियामेंट्री बोर्ड का गठन कर सकतें है।
संघ के राष्ट्रीय नेता से सहमति जताते हुए भाजपा के राष्ट्रीय नेता का कहना है कि संसदीय बोर्ड का पुर्नगठन फरवरी अंत तक होना तय है। फरवरी में बजट सत्र की समाप्ति के बाद संगठन की नियुक्तिया की जाएंगी।
देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा के स्थापना के बाद पहली बार भाजपा की सबसे ताकतवर और सर्वाच्च बाडी में इतनें पद रिक्त है और भाजपा के कौन से दिग्गज नेता इसमें जगह बनानें में सफल होतें है।

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